हिंदी व्याकरण, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और महात्मा गांधी का जीवन परिचय
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उपसर्ग (Prefix)
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परिभाषा:
उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द के शुरू में जुड़कर उसके अर्थ में विशेषता लाते हैं या उसके अर्थ को बदल देते हैं।
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उदाहरण:
- प्र + काश = प्रकाश (पहले से अधिक चमक)
- अ + टल = अटल (जो टाला न जा सके)
- अनु + भव = अनुभव
- अभि + मान = अभिमान
प्रत्यय (Suffix)
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परिभाषा:
प्रत्यय वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द के अंत में जुड़ते हैं और शब्द के अर्थ या रूप में बदलाव लाते हैं।
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उदाहरण:
- खेल + ना = खेलना (क्रिया)
- लिख + आई = लिखाई
- चिल्ला + आहट = चिल्लाहट
- पठ + नीय = पठनीय (विशेषण)
समास (Compound)
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परिभाषा:
समास दो या दो से अधिक शब्दों को जोड़कर एक नया, संक्षिप्त और सार्थक शब्द बनाने की प्रक्रिया है।
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उदाहरण:
- माता-पिता: (माता और पिता)
- जलपान: (जल पीने का काम)
- पुस्तकालय: (पुस्तक + आलय)
- घर-घर: (प्रत्येक घर में)
भारत वंदना: कविता का परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित "भारत वंदना" कविता एक देशभक्तिपूर्ण रचना है, जिसमें कवि भारत माता का गुणगान करते हुए हर भारतवासी को अपनी मातृभूमि के प्रति कर्तव्य निभाने और सम्मान के लिए बलिदान देने हेतु प्रेरित करते हैं। इस कविता में कवि ने भारत माता को प्रकृति के तत्वों और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से चित्रित किया है तथा भारत माँ के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रेम व्यक्त किया है।
कविता का सार:
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मातृभूमि के प्रति प्रेम:
कवि इस कविता में भारत माँ का गुणगान करते हुए कहते हैं कि भारत भूमि धन्य है, जिसमें उन्होंने जन्म लिया, और उनका जीवन भी धन्य है।
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कर्तव्य की प्रेरणा:
यह कविता हर भारतवासी को अपनी मातृभूमि के प्रति कर्तव्य निभाने के लिए प्रेरित करती है। कवि कहते हैं कि अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र करना और उसके सम्मान के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर देना ही हर देशवासी का कर्तव्य है।
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भारत माता का चित्रण:
कवि ने भारत माता को पारंपरिक नारी के रूप में चित्रित किया है। उन्होंने हिमालय, गंगा नदी, तपस्या और ओंकार ध्वनि जैसे विभिन्न तत्वों के माध्यम से भारत माता के सुंदर और मनोहर रूप को प्रस्तुत किया है।
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देश के लिए बलिदान:
यह कविता देशप्रेम और बलिदान की भावना को व्यक्त करती है। कवि चाहते हैं कि हर नागरिक अपने देश की रक्षा करे और उसके सम्मान के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दे।
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प्रकृति के तत्व:
कवि ने कविता में सोने जैसी फसलें और कमल के फूल जैसे प्रतीकों का भी प्रयोग किया है, जो भारत की समृद्धि और सुंदरता को दर्शाते हैं।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला': जीवन परिचय
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
- जन्म: 21 फरवरी, 1899 को महिषादल, मेदिनीपुर (बंगाल) में हुआ।
- मूल निवास: उनके पिता उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़ाकोला गाँव के मूल निवासी थे।
- शिक्षा: उनकी प्रारंभिक शिक्षा महिषादल में हुई और उन्होंने स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी का गहन ज्ञान अर्जित किया। संगीत और दर्शन में भी उनकी विशेष रुचि थी।
- पारिवारिक जीवन: बचपन में ही उनकी माँ का निधन हो गया। उनकी पत्नी और पुत्री सरोज की मृत्यु ने उन्हें गहराई तक झकझोर दिया।
साहित्यिक जीवन
- मुक्त छंद के प्रवर्तक: निराला हिंदी कविता के पहले कवि थे जिन्होंने मुक्त छंद (बिना तुकांत पंक्तियों वाली कविता) का प्रयोग कर उसमें क्रांति ला दी।
- रचनाएँ: उन्होंने कई कविताएँ, कहानियाँ और उपन्यास लिखे। उनकी प्रसिद्ध काव्य रचनाओं में 'परिमल', 'गीतिका', 'अनामिका', 'कुकुरमुत्ता' और 'सरोज स्मृति' शामिल हैं।
- सामाजिक और राष्ट्रीय भावनाएँ: उनकी कविताओं में प्रेम, सौंदर्य, भक्ति और राष्ट्रीयता की भावनाएँ स्पष्ट दिखती हैं। प्रकृति के प्रति गहन लगाव और सामाजिक अन्याय की आलोचना भी उनकी कविताओं का महत्वपूर्ण अंग है।
- संपादन कार्य: उन्होंने रामकृष्ण मिशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'समन्वय' (1922) और 'मतवाला' पत्रिका (1923-24) के संपादक मंडल से भी जुड़ाव रखा।
अंतिम वर्ष
- जीवन भर पारिवारिक और आर्थिक कष्टों से जूझते रहने के बाद, उन्होंने इलाहाबाद में अपना जीवन व्यतीत किया।
- उनका निधन 15 अक्टूबर, 1961 को हुआ।
चोरी और प्रायश्चित: महात्मा गांधी
"चोरी और प्रायश्चित" महात्मा गांधी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' का एक अध्याय है, जिसमें वे अपनी किशोरावस्था में हुई चोरियों और फिर अपने द्वारा की गई प्रायश्चित की घटना का वर्णन करते हैं। इस घटना में, वह अपने एक रिश्तेदार के साथ मिलकर बीड़ी पीने के लिए पैसे चुराते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है और वह अपने पिता को पत्र लिखकर सब कुछ स्वीकार करते हैं। इस अध्याय से यह सीख मिलती है कि बुराई करने के बाद पश्चाताप करना और अपराध स्वीकार करना ही सबसे बड़ा प्रायश्चित है, जिससे व्यक्ति का आत्मिक सुधार होता है और समाज में विश्वास कायम होता है।
घटना का सार
- बीड़ी पीने का शौक: गांधीजी 13 वर्ष की आयु में बीड़ी पीने लगे, क्योंकि उनके एक रिश्तेदार को भी इसकी लत थी।
- पैसे की चोरी: बीड़ी पीने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने अपने दादाजी की अलमारी से पैसे चुराए।
- आत्मग्लानि: चोरी के बाद उन्हें आत्मग्लानि हुई और उन्होंने आत्महत्या की भी कोशिश की, पर सफल न हो सके।
- प्रायश्चित: अंततः, उन्होंने अपने पिता को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी सारी गलतियों को कबूल किया और माफी मांगी।
- पिता की प्रतिक्रिया: उनके पिता ने पत्र पढ़ा और अत्यधिक दुखी हुए। उन्होंने गांधीजी को माफ कर दिया और उनकी इस अपराध-स्वीकृति से वह उनके विषय में निर्भय बने।
इस घटना से मिली सीख
- अपराध स्वीकार करना: महात्मा गांधी ने दिखाया कि अपराध की जिम्मेदारी लेना और स्वेच्छा से उसे स्वीकार करना सबसे बड़ा प्रायश्चित है।
- आत्म-सुधार: प्रायश्चित व्यक्ति को आत्ममंथन और आत्म-सुधार की प्रक्रिया में मदद करता है, जिससे वह भविष्य में गलत कार्यों से बचता है।
- बुरी संगति से दूर रहना: यह कहानी यह भी सिखाती है कि हमें बुरी संगत से दूर रहना चाहिए, क्योंकि यह हमें गलत रास्तों पर ले जा सकती है।
- सामाजिक विश्वास: प्रायश्चित के माध्यम से समाज में विश्वास बहाल होता है और न्याय तथा शांति को बनाए रखने में मदद मिलती है।
महात्मा गांधी: जीवन परिचय
शुरुआती जीवन और शिक्षा
- जन्म: महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।
- परिवार: उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था, और उनकी माता का नाम पुतलीबाई था।
- शिक्षा: गांधीजी ने अपनी शुरुआती शिक्षा राजकोट में प्राप्त की और बाद में अहमदाबाद से हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की। 1888 में उन्होंने वकालत की पढ़ाई करने के लिए लंदन में प्रवेश लिया।
- विवाह: गांधीजी का विवाह 13 साल की उम्र में कस्तूरबा गांधी से हुआ था।
दक्षिण अफ्रीका में संघर्ष
- 1893 में, गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में वकालत का कार्य करने के लिए गए।
- वहाँ उन्हें रंगभेद और नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा, जिसने उन्हें नस्लीय समानता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया।
- उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में नटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की।
भारत में नेतृत्व
- भारत आगमन: 1915 में, गांधीजी भारत वापस आ गए।
- अहिंसक आंदोलन: उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों के आधार पर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया।
- प्रमुख आंदोलन: उनके नेतृत्व में असहयोग आंदोलन (1920) और दांडी यात्रा (1930) जैसे कई महत्वपूर्ण आंदोलन हुए।
- भारत छोड़ो आंदोलन: 1942 में, उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया, जिसमें ब्रिटिश शासन को समाप्त करने की मांग की गई थी।
जीवन का अंत
- 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी।